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সিএসআইআর - সেন্ট্রাল মেকানিক্যাল ইঞ্জিনিয়ারিং রিসার্চ ইনস্টিটিউট, বিজ্ঞান ও প্রযুক্তি মন্ত্রণালয়, ভারত সরকার सीएसआईआर - केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार CSIR - Central Mechanical Engineering Research Institute, Ministry of S&T, Govt. of India
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आखरी अपडेट : 24 अगस्त, 2026

एसएसबीएमटी-2018

  

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 शांति स्वरूप भटनागर

सर शांति स्वरूप भटनागर (21 फरवरी, 1894 – 1 जनवरी, 1955)

मैं सदैव अन्य क्षेत्रों में विशिष्ट अनेक प्रमुख व्यक्तियों के संपर्क में रहा हूँ, किंतु डॉ. भटनागर अनेक गुणों का एक विशेष समन्वय थे। इसके साथ उनमें कार्यों को पूरा करने की अद्भुत ऊर्जा और उत्साह भी था। इसका परिणाम यह हुआ कि उन्होंने उपलब्धियों का ऐसा उल्लेखनीय अभिलेख छोड़ा, जो वास्तव में असाधारण था। मैं निःसंकोच कह सकता हूँ कि यदि डॉ. भटनागर न होते, तो आज आप राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की इस श्रृंखला को नहीं देख पाते।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                         - पंडित जवाहरलाल

            डॉ. भटनागर का जन्म शाहपुर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनके पिता परमेश्वरी सहाय भटनागर का निधन तब हो गया था, जब वे केवल आठ माह के थे। उन्होंने अपना बचपन अपने नाना के घर में बिताया, जो एक अभियंता थे। वहीं उनमें विज्ञान और अभियांत्रिकी के प्रति रुचि विकसित हुई। उन्हें यांत्रिक खिलौने, इलेक्ट्रॉनिक बैटरियाँ, डोरी वाले टेलीफोन आदि बनाना बहुत पसंद था। अपने ननिहाल से उन्हें कविता की प्रतिभा भी विरासत में मिली और उनके द्वारा लिखे गए उर्दू एकांकी नाटक ‘करामाती’ ने एक प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया।

            अपने महत्वपूर्ण योगदान के सम्मान में उन्हें अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए। वर्ष 1936 में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें ‘ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर’ से सम्मानित किया। वर्ष 1941 में उन्हें ‘नाइट बैचलर’ की उपाधि प्रदान की गई। ‘सोसाइटी ऑफ केमिकल इंडस्ट्री’ (यू.के.) ने वर्ष 1943 में उन्हें मानद फेलो निर्वाचित किया और बाद में वे इसके उपाध्यक्ष भी बने। विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान की इससे भी बड़ी मान्यता यह थी कि वर्ष 1943 में उन्हें लंदन की रॉयल सोसाइटी का फेलो निर्वाचित किया गया। वे इंडियन साइंस कांग्रेस और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के पूर्व अध्यक्ष तथा एशियाटिक सोसाइटी के मानद फेलो रहे। जिन विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की, उनमें ऑक्सफोर्ड, आगरा, इलाहाबाद, बनारस, दिल्ली, लखनऊ, पटना और सागर विश्वविद्यालय शामिल हैं। वर्ष 1954 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

            वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने 26वीं सितंबर, 1942 को कार्य करना प्रारंभ किया। बीएसआईआर और आईआरयूसी को सीएसआईआर के सरकारी निकाय के सलाहकार निकाय के रूप में नामित किया गया। वर्ष 1943 में सीएसआईआर के शासी निकाय ने भटनागर द्वारा प्रस्तावित पाँच राष्ट्रीय प्रयोगशालाएँ स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी – राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला, राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला, ईंधन अनुसंधान केंद्र तथा काँच एवं सिरेमिक अनुसंधान संस्थान। वर्ष 1944 में सीएसआईआर को उसके 10 लाख रुपये के वार्षिक बजट के अतिरिक्त तीन प्रयोगशालाओं की स्थापना के लिए 1 करोड़ रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। टाटा औद्योगिक समूह ने रासायनिक, धातुकर्मीय और ईंधन अनुसंधान प्रयोगशालाओं के लिए 20 लाख रुपये का दान दिया।

            उनके निधन के पश्चात् सीएसआईआर ने प्रख्यात वैज्ञानिकों के सम्मान में उनके नाम पर शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार की स्थापना की। उनके द्वारा प्रदान की गई सेवाओं की स्मृति में सीएसआईआर का खेल प्रोत्साहन बोर्ड प्रत्येक वर्ष इनडोर और आउटडोर खेलों का आयोजन करता है।

 

सीएसआईआर-एसपीबी के बारे में

           खेल मनोरंजन का एक सार्वभौमिक माध्यम हैं। वे उत्कृष्टता प्राप्त करने की मानव आकांक्षाओं की महान अभिव्यक्तियों में से एक हैं। इसके अतिरिक्त, खेल स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन के निर्माण और उसे बनाए रखने में सहायक होते हैं। संभवतः इन्हीं कारणों से खेलों का आयोजन और मनोरंजनात्मक वातावरण का निर्माण सीएसआईआर की कार्मिक नीति का एक अभिन्न अंग बन गया।

           1955 में हमारे संस्थापक महानिदेशक डॉ. एस.एस. भटनागर के आकस्मिक निधन के पश्चात् इस सीएसआईआर खेल प्रतियोगिता का विस्तार अखिल भारतीय स्तर तक किया गया, जिसमें सभी सीएसआईआर प्रयोगशालाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई। उनकी स्मृति में इसका नाम ‘सर शांति स्वरूप भटनागर स्मृति खेल प्रतियोगिता’ रखा गया। प्रारंभिक वर्षों में इसका आयोजन द्विवार्षिक रूप से किया जाता था, जिसमें क्रिकेट, वॉलीबॉल, टेनिस, बास्केटबॉल, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, शतरंज, कैरम और ब्रिज जैसी खेल प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती थीं। सीएसआईआर मुख्यालय कर्मचारी क्लब द्वारा प्रत्येक वैकल्पिक वर्ष में सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं में 7 से 8 दिनों की अवधि में इस प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता था। वर्ष 1956 में एनपीएल में आयोजित भटनागर स्मृति प्रतियोगिता को प्रथम अखिल भारतीय सीएसआईआर खेल प्रतियोगिता कहा जा सकता है। ये प्रतियोगिताएँ वर्ष 1980 तक नियमित रूप से आयोजित होती रहीं, हालांकि वर्ष 1965 में चीन युद्ध के दौरान इनमें कुछ समय के लिए विराम रहा।

           इस बीच, सीएसआईआर ने अपनी प्रणाली में खेलों को और अधिक प्रोत्साहन देने पर विचार किया। तदनुसार रेलवे, डाक एवं तार आदि विभागों के अनुरूप सीएसआईआर खेल नियंत्रण बोर्ड का गठन करके एक आधिकारिक मंच प्रदान किया गया। मार्च, 1980 में सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट XXI, 1860 के अंतर्गत सोसाइटी के रूप में पंजीकरण के साथ सीएसआईआर खेल नियंत्रण बोर्ड को औपचारिक रूप प्रदान किया गया। खेल नियंत्रण बोर्ड के उद्देश्यों/भूमिका को ध्यान में रखते हुए इसका नाम बदलकर खेल प्रोत्साहन बोर्ड (एसपीबी) कर दिया गया।

 

भाग लेने वाली प्रयोगशालाएँ/संस्थान

 

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