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मुख्य पृष्ट

सी.एस.आई.आर - सीएमईआरआई

সিএসআইআর - সেন্ট্রাল মেকানিক্যাল ইঞ্জিনিয়ারিং রিসার্চ ইনস্টিটিউট, বিজ্ঞান ও প্রযুক্তি মন্ত্রণালয়, ভারত সরকার सीएसआईआर - केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार CSIR - Central Mechanical Engineering Research Institute, Ministry of S&T, Govt. of India
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योजना परियोजना

मानव गैस्पिंग क्रिया के मूल्यांकन हेतु गति संवेदन सहित बल-प्रतिपुष्टि प्रणाली

प्रयोगशाला में वर्तमान में चार उंगलियों से युक्त एक हस्त एक्सोस्केलेटन का अभिकल्प एवं विकास किया गया है। प्रत्येक उंगली की लिंकज प्रणाली में 16 लिंकज हैं तथा इसे 3 स्वतंत्रता की कोटियों (DOF) के लिए अभिकल्पित किया गया है, जबकि केवल 1 DOF को सक्रिय किया गया है, जिससे 2 अतिरिक्त DOF विद्यमान रहते हैं। ये अतिरिक्त स्वतंत्रता की कोटियाँ एक महत्वपूर्ण विशेषता हैं, ताकि किसी विशेष जोड़ पर कठोर रूप से आरोपित गति या बल को रोका जा सके। लगाया गया बल उंगली के जोड़ों के प्रतिरोध/कठोरता के आधार पर विभिन्न जोड़ों में वितरित होता है।

जैव-डीजल परीक्षण प्रयोगशाला की अवसंरचनात्मक सुविधा

आंतरिक आवश्यकताओं की पूर्ति एवं संभावित व्यावसायिक विकास के लिए सहायक अवसंरचनात्मक सुविधा का विकास करना। गैस क्रोमैटोग्राफी के माध्यम से कच्चे वनस्पति तेल, जैव-डीजल, जैव-एथेनॉल एवं बायोगैस की गुणवत्ता का विश्लेषण किया जा सकेगा।

ग्रामीण क्षेत्र के लिए अर्ध-सतत प्रकार के जैव-डीजल संयंत्र का अभिकल्प एवं विकास

अर्ध-सतत प्रकार के ऐसे जैव-डीजल संयंत्र का अभिकल्प एवं विकास करना, जो ग्रामीण क्षेत्र के लिए उपयुक्त हो; जैव-डीजल संयंत्र का परीक्षण करना तथा संयंत्र द्वारा उत्पादित जैव-डीजल का परीक्षण करना।

सेंसर, एक्चुएटर एवं MEMS उपकरणों के लिए नैनो-स्नेहन की संकल्पना एवं अभिकल्प

सेंसर, एक्चुएटर एवं MEMS के लिए आसंजन, स्टिक्शन एवं घर्षण के बेहतर नियंत्रण हेतु स्नेहक नैनोकणों से युक्त मिश्रित लेपों का अभिकल्प एवं विकास करना।

सीएसआईआर समेकित कौशल पहल (चरण-II)

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (S&T) क्षेत्र में वर्तमान एवं उभरती हुई औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप विविध क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान कर उच्च गुणवत्ता युक्त कुशल मानव संसाधन का विकास करना।
  • उद्योगों की क्षेत्रवार आवश्यकताओं तथा ‘मेक इन इंडिया’ जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अनुरूप कुशल कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित कर मानव संसाधन संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करना।

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